मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने रद्द किया अपना विदेश दौरा
भारत की सबसे सर्वोच्च अदालत उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अगले महीने 17 नवंबर को अपने पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सेवानिवृत्त होने से पहले उन्हें दक्षिण अमेरिका मध्य पूर्व और कुछ अन्य देशों की यात्रा पर जाना था। मगर उन्होंने अपना विदेश दौरा रद्द कर दिया है।
दरअसल 5 सितंबर से लगातार जारी राम जन्मभूमि विवाद मामले की सुनवाई में 5 जजों की बेंच में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई थे। उन्होंने पूरे मामले को अपने साथियों के साथ गंभीरता से सुना और इसके हर पहलू पर चर्चा होने के बाद देश की उच्चतम न्यायालय 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 17 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने से पहले देश के सामने सदियों से चले आ रहे राम जन्मभूमि विवाद को लेकर फैसला सुना दिया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दिए हैं कई अहम फैसले
पिछले वर्ष 3 अक्टूबर को रंजन गोगोई ने मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उसके बाद के कार्यकाल से लेकर उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय सुनाए हैं। जिनमें से एक निर्णय तीन तलाक जैसे अहम विषय का है जोकि मुस्लिम समाज में ऐसी विपत्ति बन गया था। जो मुस्लिम महिलाओं को अपनी जद में ले कर उन्हें प्रताड़ित कर रहा था। ऐसे गंभीर मुद्दे पर रंजन गोगोई ने अपने निर्णय दिए। जाते जाते मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई देश के सबसे पुराने मुद्दे राम जन्मभूमि विवाद पर अपना निर्णय देकर जाएंगे। यह देश के लिए बहुत ही ऐतिहासिक होगा।
हिंदुओं की आस्था का रखा जाए ख्याल : मुगल वंशज
मुगल वंशज प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तू सीने एक बयान जारी कर कहा है कि उच्चतम न्यायालय को देश के 100 करोड़ हिंदुओ की आस्था का ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर हिंदू पूजा करते हैं। वहां पर किसी भी तरह से मस्जिद बनाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने मिस्र की एक अल अजहर यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए कहां की वहां पर से फतवा जारी कर कहा गया है कि विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती है।
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